The Ultimate Spy You Cannot Escape

The Seeing

by Jayaram V

Question: People say God knows everything because he watches over us all? Does he? Does God really care about what we do? If it is so why is there so much evil in this world?

The following was originally written by me in Hindi and translated into English. The original Hindi version is at the end of this essay. I do not write frequently in Hindi. Therefore, please bear with my writing.

It is an illusion that no one is watching you. Many people think that when no one is noticing them they can do anything. You might have also entertained similar thoughts because it is human to think so.

However, it is incorrect. There is no such possibility at all of its happening. It is because wherever you go and in whatever corner you may hide yourself, in every place, every corner and in everything you will see the world.

Wherever you may be, the world is always with you. Whatever you may be doing, you will be seeing yourself as your own witness. Because of these two seers it is not at all possible that no one is watching you or no one is aware of whatever you do.

Where is not the world? When you live in the world and when you manage your life with the help of the world, how can you live apart from it?

You might have frequently heard that the world has fallen asleep, or it has woken up. People also say the world is asleep or awake.

In reality the world neither sleeps nor wakes up. It has always been engaged in work so that all the living beings can live in it and spend their lives. The world never sleeps, it is the people who sleep and awake.

The world has no rest. It keeps on working continuously. If the world sleeps, then everything in it will fall asleep. This is the way of the world. When the world becomes asleep, we call it the end times, about which you might have often read in the Puranas and the scriptures

Our religion says that you should never think that no one is noticing you because the Self of every living being is its real witness. It means your Self indeed is inner witness.

You may escape from others, but you can never escape from your witness Self. Any action which you perform or keep performing, your Self is a witness to all that

Your soul is verily your witness. He sees all and keeps a record of all your actions.

He does not have the distinction of you and me. From his perspective, all are one. In his understanding the support and the doer of all actions is also One only.

Since he is the witness of all, he knows about everyone, including you. When you finally depart from this world on your last journey, then he will take with him the fruit of all your actions (karma). According to that only he initiates your next life.

To keep the list of your actions (karma) there is no need for any external force or mechanism. A whole universe is hidden in you. Both Chitragupt and Lord Yama are hidden in you as your very Self, and so also all the gods and demons of the universe in their own respective spheres. And according to your actions, they remain absorbed in their duties.

If you are cruel and deceitful, the strength of the demons grows manifold in you. Then, they will burn you in the conflagration of cruelty and demonic nature and drown your inner universe in total darkness.

If divine nature becomes predominant in you, all the gods become happy and cooperate with you in your works, making your inner world a heaven.

If you believe that you are an aspect of Brahman himself, then you have to live like Brahman, accepting the duties of Brahman as your own. This is the principle of life, and the summary of the yoga of action (karmayoga)

According to this principle only, the fruit of your actions manifest in your life. Forgetting that you are an aspect of God, when you embrace egoistic selfishness and become immersed in it, then arises the great misfortune of becoming the cause and the doer of your actions and the possibility of suffering from its consequences.

Therefore, do not ever think that no one is noticing you or your actions, or the world is asleep. The world sees everything as your Self from your inside, becoming your witness Self. It remains awake, even when you are asleep since it does not require rest.

You cannot escape from your Self. Hence, not by escaping from the world, but by acknowledging the world and you as your witness, you should live and perform your actions.

The world is a great creation of Brahman and a great aspect of his. In the Vedas, it goes by the name Viraj (the illuminated one). All the mortal beings are his aspects only, and your soul is verily an aspect of his soul. That only is the doer and the cause of your life.

Therefore, fill the world in you with the effulgence of the Self and offer him all your actions, placing them before him. Then your life becomes a great sacrifice, and neither the world in you nor the world outside can ever bring you into their control.

Hindi Translation

लेखक : जयराम वी

यह एक भ्रान्ति है कि आपको कोई नहि देख रहा है | बहुत लोग सोचते है की जब कोई नही देख रहा है तो वे कुछ भी कर सकते हैं | आप भी कभी वैसे सोचे होंगे कयोंकि यह मानव स्वभाव है |

मगर यह गलत है | वैसे संभावना बिल्कुल नामुमकिन है | कयोंकि आप कहीं भी जाईये किसी भी कोने मे छिप जाईये, आप को हर जगह मे, हर कोने मे और हर वस्तु में दुनिया नजर आयेगी |

आप जहा भी हो, दुनिया आपके साथ रहेगा | आप कुछ भी कर रहे हो आप खुद को साक्षी बनकर देख रहे होंगे | इन दो द्रष्टाओं के कारण ऐसे संभावना ही नही है कि आपको कोई नही देख रहे हैं और आप कुछ भी कर रहे हैं और किसी को पता नहि |

दुनिया कहा नहीं है? जब आप दुनिया में रहते हैं और दुनिया से अपना काम चलाते हैं तब आप उससे कैसे अलग रह सकते हैं?

आपने अक्सर यह सुने होंगे कि दुनिया सो गया है या जाग गया है | लोग भी बोलते हैं कि दुनिया सो रहा है या जागा हुआ है |

वास्तव मे दुनिया न सोता है न जागता है | वह निरंतर काम मे व्यस्त रहता है ताकि सब जीव प्राणी उसमे रह सके और अपने अपने जिंदगी जी सके | दुनिया कभी नही सोता है, बल्कि लोग सोते हैं और जागते हैं |

दुनिया को कभी आराम नहीं है| वह निरंतर चलता ही रहता है | अगर दुनिया सो जाएगा तब सब कुच्छ सो जाएगा | यही दुनिया का नियम है| जब दुनिया सोता है, उसे हम प्रलयकाल कहते हैं, जिसका जिक्र आप कई पुरानों में और शास्त्रों में अक्सर पढ़े होंगे|

हमारा धर्म कहता है कि यह नही सोचना कि कोई नही देख रहा है, कयोंकि हर जीवि का आत्मा उसका असली साक्षी है | इसका मतलब आपका आत्मा आपका ही मनो साक्षी है|

आप दूसरों से बचकर रह सकते हैं मगर आपके ही आत्मा से कभी नही | जो भी आप करते हैं या कर रहे हो वो सब के साक्षी आपका आत्मा होता है | आप सबसे बच कर और सब से अलग होकर रह सकते हैं, मगर अपने ही आत्मा से कभी नहीं |

आपका आत्मा ही आपका सर्व साक्षी है| वह सब देखता है और आपका हर काम का छिट्टा लिखता है|

उनको आप और हम का कोई अंतर नहीं है| उनके ददृष्टिकोण मे सब एक हैं | उनके समझ मे सबके आधार और व्यवहार का करता और कारन भी एक ही है|

वह सबके साक्षी होने के कारण, सबके बारे मे सब कुच्छ जानता है, और आपके बारे मे भी | जब आप दुनिया से अंतिम प्रस्तान करेंगे, तब वह आपके कर्मफल अपने साथ ले जाता है| उसी के अनुसार आपका अगले जन्म का प्रारंभ करता है|

आपके कर्मों का सूची सँभालने केलिए कोई बहार की शक्ति या व्यवस्था की जरूरत नहीं है| आपके अनदर एक विश्व छिपा हुआ है | चित्रगुप्त और यमराज दोनों ही आपके अन्दर आत्मा के रूप मे बसे हुए है| और विश्व के सभी देवता और दानव भी अपनी अपनी स्थानों पर | और आपके कर्मो के अनुसार वे अपने कामों मे मग्न रहते है|

अगर आप क्रूर और कपट हैं, दानवों के ताकत आप में ज्यादह बढ़ेगी | तब वे आपको क्रूरता और दानवता की अग्नि में खूब जलाएंगे और आपके अनदर के विश्व को महा अन्धकार मे दुबायेंगे |

अगर आप में दैविकता ज्यादा प्रभावशाली रहता है तो सभी देवता आप से खुश रहेंगे और आपके कर्मो में अपने सहयोग देकर आपके अंतराल को स्वर्ग बनायेंगे |

अगर आप आपने आपको ब्रह्मन के अंश समझते हैं, तब आपको ब्रह्मन जैसा जीना पड़ेगा और ब्रह्मन का धर्म अपना धर्म समझ कर जीना पड़ेगा | यही जिंदगी का नियम है और कर्मयोग का सारांश भी|

कर्मफल इसी सिद्धांत के अनुस्सर आपके जीवन में पैदा होता है| जब आप भगवान के अंश होने की सत्य को भूल कर अपनापन को ओढ़ते हैं और उस में मग्न होजाते हैं, तब आप को अपने कर्मो का कर्ता और कारण बनने की दुस्तिती पैदा होगी और उनके परिणाम को भुगतने की परिस्तिती भी|

इसीलिए आप यह कभी नहीं सोचना कि कोई नहीं आपको को या आपके कर्त्रुतों को नही देख रहा है या दुनिया सोया हुवा है | दुनिया देखता है सब कुच्छ आपके आत्मा के रूप मे आपके अनदर से और आप के आत्मसाक्षी बनकर | जब आप सोते हैं तब भी वह जगा रहता है क्योकि उसको विश्राम का जरुरत नहि है |

आप आत्मा से नहि बच सकते हैं | इसलिए दुनिया से बचके नहीं बल्कि दुनिया को और खुदको अपना आत्मसाक्षी मानकर अपना जिन्दी बिताईये और अपना धर्म निभाईये |

दुनिया ब्रह्मन का एक महा श्रृष्टि और एक महा अंश है | वेदों मे वह विराज के नाम से भी जाना जाता है | सभी जीवि उनके ही अंश हैं और उनके आत्मा का अंश है आपके देहात्मा | वही आपके जिंदगी का कर्ता और कारण भी|

इसीलिए, आपके अन्दर के दुनिया को आत्मा के प्रकाश से भर दीजिये और अपना सभी कर्मोंको उनके समक्ष मे अर्पण करो | तब आपका जिंदगी एक महायग्न बन जाएगा और आपके अन्दर की और बाहर की दुनिया आपको कभी अपने वश मे नही लेपायेगा |

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